एयर टर्बुलेंस क्या है? तेज़ हवाओं में विमान का फँसना

जो लोग विमान यात्रा करते रहते हैं, वो टर्बुलेंस से वाक़िफ़ होंगे.

टर्बुलेंस के कारण प्लेन की ऊँचाई और स्थिरता में बदलाव दिखता है. टर्बुलेंस के दौरान विमान ज़ोर-ज़ोर से हिलने लगता है.

बीबीसी वेदर के सिमॉन किंग के मुताबिक़ ज़्यादातर टर्बुलेंस तब होते हैं, जब हवाएँ ऊपर या नीचे की ओर से तेज़ गति से चलती हैं.

ज़्यादातर मौक़े पर टर्बुलेंस से लगने वाले झटके हल्के होते हैं. लेकिन अगर बादल बड़े और घने हों, तो हवा की दिशा और रफ़्तार टर्बुलेंस की तीव्रता को ख़तरनाक ढंग से बढ़ा सकती है.

ऐसा क्यूम्यलोनिम्बस नाम के बादलों के कारण हो सकता है. ये ऐसे विशाल बादल होते हैं, जिनके गरजने की आवाज़ बहुत तेज़ होती है और इनके आपस में टकराने से बिजली भी चमकती है.

टर्बुलेंस होने का सबसे सामान्य कारण है- विमान का बादलों से गुज़रना.

लेकिन टर्बुलेंस एक अन्य तरीके का भी होता है. इसे क्लीयर एयर टर्बुलेंस कहते हैं.

जैसा नाम से पता चल रहा है, इसमें बादल नहीं होते हैं और इन्हें देखा नहीं जा सकता.

इस प्रकार के टर्बुलेंस से अधिक परेशानी होती है, क्योंकि इसका पूर्वानुमान मुमकिन नहीं होता.

एविएशन एक्सपर्ट और कमर्शियल पायलट ग्रैट्टन कहते हैं, “इस तरह के टर्बुलेंस जेट स्ट्रीम के क़रीब होते हैं.”

आसान भाषा में कहें, तो जेट स्ट्रीम को आप तेज़ बह रही हवाओं की एक ‘नदी’ समझिए, जो आमतौर पर 40-50 हज़ार फुट की ऊँचाई पर पाई जाती हैं.

ग्रैटन कहते हैं कि जेट स्ट्रीम और इसके आसपास की हवा की रफ़्तार आम तौर पर 100 मील प्रति घंटे की होती है.

जेट स्ट्रीम के आसपास की धीमी और तेज़ हवाओं में टकराव के कारण टर्बुलेंस होता है. जेट स्ट्रीम को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल होता है.

उदाहरण के लिए अगर आप यूरोप से उत्तरी अमेरिका की ओर जा रहे हैं, तो इससे बचना मुश्किल है.

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